1. प्राचीन वैभव और निर्माण बीजामंडल का मूल नाम विजय मंदिर है। इतिहासकारों के अनुसार, इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में मालवा के परमार राजाओं द्वारा किया गया था। यह मंदिर भगवान शिव और सूर्य देव को समर्पित था। विशालता: ऐसा माना जाता है कि अपने चरम काल में यह मंदिर इतना विशाल था कि इसकी ऊंचाई और भव्यता की तुलना कोणार्क के सूर्य मंदिर या खजुराहो के मंदिरों से की जा सकती थी। वास्तुकला: मंदिर का आधार (platform) बहुत ऊंचा है, जो इसकी विशाल संरचना का प्रमाण देता है। यहाँ की नक्काशीदार शिलाएं और स्तंभ परमार कालीन कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। 2. हमलों और विनाश का काल अपनी धन-संपदा और भव्यता के कारण यह मंदिर कई विदेशी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा। इल्तुतमिश (1234 ई.): सबसे पहला बड़ा हमला दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश ने किया, जिसने मंदिर को भारी क्षति पहुँचाई। अलाउद्दीन खिलजी: बाद के समय में खिलजी ने भी इसे लूटा। औरंगजेब (1682 ई.): मंदिर के इतिहास में सबसे निर्णायक मोड़ औरंगजेब के शासनकाल में आया। उसने मंदिर के ऊपरी हिस्से को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और इसके मलबे का उपयोग करक...


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