Bija Mandal, Vidisha Temple

 


1. प्राचीन वैभव और निर्माण

बीजामंडल का मूल नाम विजय मंदिर है। इतिहासकारों के अनुसार, इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में मालवा के परमार राजाओं द्वारा किया गया था। यह मंदिर भगवान शिव और सूर्य देव को समर्पित था।

  • विशालता: ऐसा माना जाता है कि अपने चरम काल में यह मंदिर इतना विशाल था कि इसकी ऊंचाई और भव्यता की तुलना कोणार्क के सूर्य मंदिर या खजुराहो के मंदिरों से की जा सकती थी।

  • वास्तुकला: मंदिर का आधार (platform) बहुत ऊंचा है, जो इसकी विशाल संरचना का प्रमाण देता है। यहाँ की नक्काशीदार शिलाएं और स्तंभ परमार कालीन कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।

2. हमलों और विनाश का काल

अपनी धन-संपदा और भव्यता के कारण यह मंदिर कई विदेशी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा।

  • इल्तुतमिश (1234 ई.): सबसे पहला बड़ा हमला दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश ने किया, जिसने मंदिर को भारी क्षति पहुँचाई।

  • अलाउद्दीन खिलजी: बाद के समय में खिलजी ने भी इसे लूटा।

  • औरंगजेब (1682 ई.): मंदिर के इतिहास में सबसे निर्णायक मोड़ औरंगजेब के शासनकाल में आया। उसने मंदिर के ऊपरी हिस्से को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और इसके मलबे का उपयोग करके वहां एक मस्जिद का निर्माण करा दिया, जिसे 'आलमगीरी मस्जिद' के नाम से जाना जाने लगा।

3. पुरातात्विक खोज और वर्तमान स्थिति

स्वतंत्रता के बाद, जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने यहाँ खुदाई और संरक्षण का कार्य शुरू किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

  • छिपी हुई मूर्तियां: खुदाई के दौरान मस्जिद के नीचे से प्राचीन मंदिर के विशाल स्तंभ, नक्काशीदार पत्थर और हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मिलीं।

  • बीजामंडल नाम: स्थानीय स्तर पर इसे 'बीजामंडल' कहा जाने लगा। आज यह एक संरक्षित स्मारक है जहाँ मंदिर का विशाल आधार और बिखरे हुए अवशेष इसके Defence (रक्षा) और गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • विशाल चबूतरा: मंदिर का आधार इतना बड़ा है कि यह दूर से ही दिखाई देता है।

  • स्तंभ और नक्काशी: यहाँ के पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी उस काल के शिल्पियों के कौशल को दर्शाती है।

  • संग्रहालय: खुदाई में मिली मूर्तियों को परिसर में ही व्यवस्थित रूप से रखा गया है।